4/2/08

मेरा दिल आज शायर हुआ है

आज अचानक कुछ हुआ है,
मेरा दिल शायर हुआ है,

कोई खुशबू सी आज हवा मे है,
ये ज़मीन, ये आसमान भी खुश से हैं,
बादलों के पार उजाला फैलाता हुआ,
शायद ये सूरज भी कुछ नया है,

चाँद कहता है चलो,
कुछ मोड़ के आगे खुशी है,
हर दुख जो मेरे आस पास था,
मानो कहीं गुम सा गया है,

प्यास का लम्बा दौर,
वो मंज़िलों की, रास्तों की अन्तहीन तलाश,
आज मन का बोझ हट गया,
मानो किसी की कसम से मन आज़ाद हुआ है,

कल तक कुछ भी करते हुए सोचते थे,
आज अचानक सब ठीक लगता है,
जो हो रहा है, क्या ये सही है,
अचानक हर सवाल बेमानी सा हुआ है,

दिल मे कई ख्याल आते थे,
ठहरे कदम भी नहीं थे उठते,
कुछ लिखने के लिए जहाँ कलम नहीं उठती थी,
आज हर लफ्ज़ कागज़ पर उतरने के लिए बेताब है,

लोग पूछते हैं कि क्या मिल गया अचानक,
आखिर कौन सा खज़ाना हासिल हुआ है,
किस खुदा की बंदगी मे लग गया तुम्हारा दिल,
जो कल तक लगता था कि काफिर हुआ है,

खुद के अन्दर जब देखा मैने,
मुझे आज खुद मे एक विजेता मिला है,
दूसरों का सहारा लेना बन्द किया मैने,
मुझे आज खुद पर भरोसा हुआ है,

कोई मुझसे करे ना करे,
आज मु को मुझी से ईश्क‍‌ हुआ है,
हाँ, शायद ये अचानक हुआ है,
मेरा दिल आज शायर हुआ है

'आपकामित्र' गुरनाम सिहं सोढी
३ फरवरी, २००८