किसी तारीफ की तारीफ करने का मन करता है,
इस १४ को किसी के साथ कहीं खो जाने का मन करता है
कुछ पीले, कुछ सफेद, बस यही रंग देखता आया हूँ गुलाबो में,
जो शर्म से एक गोरे गाल का हो जाए,
ऐसा लाल गुलाब किसी को देने का मन करता है,
बहुत दिनो से मेरे यहाँ मौसम कुछ सर्द है,
बर्फ तो है, पर बरसात नहीं हुई,
एक भीगी शाम मे एक झील के किनारे,
किसी के हाथ मे हाथ थामे भीग जाने का मन करता है,
इस कलम के शब्द कहीं के कहीं भटक जाते हैं,
लिखना कुछ शुरू करता हूँ, लिख कुछ जाते हैं,
इन शब्दों को इकट्ठा कर,
इन्हे किसी एक को समर्पित कर देने का मन करता है,
और क्या कहूँ,
रात को देर से सोने की जगह
सारी रात जागने का मन करता है,
बस यूँ ही बैठे बैठे किसी बात पर,
मुस्कुराने का मन करता है,
किसी के दिल को पढ़ने के लिए,
निगाहों की ज़ुबान सीखने का मन करता है,
किसी को अपनी बातों से हँसाने,
या किसी की बातों मे खुद खो जाने का मन करता है
दिल डरता है इश्क के अन्जाम से,
पर फिर भी किसी के साथ दिल लगाने का मन करता है,
इस १४ को किसी के साथ कहीं खो जाने का मन करता है
'आपकामित्र' गुरनाम सिहं सोढी
१० फरवरी, २००८
12/2/08
१४ फरवरी
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3 comments:
बहुत सुन्दर भाव बन पढ़े हैं । लिखते रहिये ।
सुन्दर कविता।
बडे ही खूबसूरत अंदाज से भावनाओं को कविता के रुप मे उतारा है।
अंदाज पसंद आया। अच्छी रचना।
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