चलो आज मिल कर कुछ खास लिख जाएँ,
ऐसे शब्द जो किसी कागज़ पर नहीं, सबके दिलों पर टिक जाएँ,
अपने दिल को एक सफेद कागज़ की तरह साफ करें,
जिस पर सब भावनाएँ ज्यों की त्यों दिख पाएँ,
किसी की मुस्कान से कुछ देर के लिए कलम ले लें,
किसी आँख की चमक की स्याही को इक्ट्ठा कर लाएँ
एक बच्चे की मासुमियत सा कोई विषय चुने
बाग के फूलों की तरह हर जगह को महका जाएँ,
प्रकृति की इस बहार से कुछ शब्द उधार ले,
मिला दे उसमे प्यार के कुछ भाव,
इन पत्थरों के संगीत मे पिरो दे इन दोनो को,
तो एक मधुर कविता बन जाए,
उस कविता को सजाते अलंकार मानो किसी दुल्हन के हों,
एक माँ की ममता से पवित्र भाव हों,
सूरज की किरण सा उज्जवल लक्षय हों,
जो चाँद की शीतलता से मधुर तरीके से कह जाएँ,
कोई उदास मन, रोता हुआ चेहरा,
जो समझे इस कविता की कीमत,
चलो ढूँढे कोई ऐसा,
जिसके चेहरे पर एक मुस्कान ला पाएँ,
बस यूँ ही कुछ खुशियाँ लिखने बैठे हम,
पता ही ना चले और एक किताब बन जाए,
'आपकामित्र' गुरनाम सिहं सोढी
२२ नवम्बर, २००७
18/12/07
चलो आज मिल कर कुछ खास लिख जाएँ
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