2/11/07

एक मोड़ पर खड़ा राही...

एक राही,
दोराहे पर खड़ा,
एक नए मोड़ की ओर देख रहा है,
अपने आने वाले कल के
कुछ सुनहरे सपने देख रहा है,

एक नई आशा, नई उमगों के साथ,
वो नया मोड़ उसको बुला रहा है,
हर पल एक नया आकर्षण, एक नया लोभ,
एक सम्मोहन की तरह उस पर फैला रहा है,

राही भी तैयार है,
अपनी राह बदलने के लिए,
उस पुरानी राह को छोड़,
उस नए मोड़ पर मुड़ने के लिए,

तभी मानो किसी ने उसे एक करुण आवाज़ मे बुलाया,
मैं तुम्हारी राह हूँ,
अपना परिचय कराया,

तुम्हारे आज तक के सफर मे मैने तुम्हारा पूरा साथ निभाया है,
तुम्हे यहाँ तक पहुँचाने के लिए मैने अपना आप गँवाया है,

तुम्हारे जीवन के हर दुख पर आँसू बहाये हैं,
तुम्हारी हर तकलीफ को अपना समझ कर अपनाया है,

तुम्हारी हर सफलता मे मैने भी खुशियाँ मनाई हैं,
एक त्योहार की तरह अपनी ज़िन्दगी सजाई है,

आज एक नई राह का आकर्षन तुम्हे खीँच रहा है,
एक नई मंज़िल का ख्वाब तुम्हारे मन मे सीँच रहा है,

उस नई राह को अपनाने के लिए तुम मेरा त्याग कर रहे हो,
मेरे हर बलिदान को खुद की सफलता से अलग कर रहे हो,

वो राही,
निस्तब्ध खड़ा, अभी तक उस राह की बातें सुन रहा था,
अपने ऊपर लग रहे आरोपों की आग मे भुन रहा था,

उन आरोपों से दुखी उस राही ने प्रत्युत्तर दिया,
अपने इरादों को उस राह के आगे स्पष्ट किया,

ऐसा नहीं कि अपनी सफलताओं को तुमसे मैं कभी अलग कर पाऊँगा,
या अपने जीवन को तुम्हारे बलिदानों से ऋण मुक्त कर पाऊँगा,

तुम्हारे प्यार और मार्गदर्शन के बिना मेरा जीवन तो क्या मैं भी व्यर्थ हूँ,
पर सदा एक राह पर चलने मे मैं असमर्थ हूँ,

ऐसा नहीं कि तुम पर चल कर अपनी मंज़िल ना पाऊँगा,
पर इस राह का प्रयोग कर कुछ जल्दी अपनी मंज़िल की ओर अग्रसर हो जाऊँगा,

सबकी आँखों मे कुछ सपने सँजोए होते हैं,
उनको पूरा करने के लिए प्रयास और साधन बढ़ाने पड़ते हैं,

बस इसी आशा मे मै यहाँ से मुड़ रहा हूँ,
कुछ नई खुशियों की तलाश मे नई राह से जुड़ रहा हूँ,

ऐसा नहीं कि इस पुरानी राह की यादें मैं भूल जाऊँगा,
या पीछे मुड़े बिना आगे ही आगे बढ़ते चले जाऊँगा,

और ये भी ज़रूरी नहीं कि राह एक बार अलग हो तो दोबारा जुड़ नहीं सकती,
यहाँ मोड़ आ गया तो दोबारा पुरानी दिशा की ओर मुड़ नहीं सकती,

यहाँ अलग हो रहा हूँ, पर किसी और मोड़ पर तुमसे ज़रूर मिलूँगा,
कुछ नई यादें इकट्ठा करने, इन यादों को ताज़ा करने,
आज नहीं तो कल ज़रूर तुमसे फिर जुड़ुँगा,

'आपकामित्र' गुरनाम सिहं सोढी
२५ अक्तूबर, २००७