24/9/07

वो बहनें किधर गईं......ਕਿੱਥੇ ਗਈਆਂ ਭੈਣਾ ਤੇ ਕਿੱਥੇ ਗਈਆਂ ਮਾਂਵਾ...

आने वाला वक्त कई सवाल लिए तैयार खड़ा है,
इन मरती बहनों के लिए ज़िम्मेवार लोगो से हिसाब माँगने पर अड़ा है,

कहाँ हैं बहने, कहाँ गई सब माएँ,
कौन बाँधेगा राखी, उस दुलारके लिए हम कहाँ जाएँ,

क्या होता है वो मौसी का रिश्ता,
बहनों के साथ झगड़े मे क्या आनन्द है,
क्या होता है प्रेयसी का प्रेम,
किसे कहते एक प्रेम प्रंसग हैं,

किन पत्थरों मे खो गई लैला,
कौन सी नदी सोहणी को निगल गई,
किन कब्रों मे हीर कैद है,
बताओ वो सब प्रेमिकाएँ किधर गईं,

इक राजा की वो रानी जाने किस कहानी मे कैद है,
या कोई और कहानी लिए वो दादी भी कहीं खो गई,

वो चूड़ियोंङ की छनकार, वो मेहंदी की खुशबू,
बहन की विदाई मे आँसूओं से लाल सुर्ख हुई आँखें जाने किधर गई,

पीछे मुड़ कर देखो, कितनी लाशें बिछा दी हैं तुमने,
एक बार तो सोचो कि तुम्हारी इन्सानियत किधर गई

'आपकामित्र' गुरनाम सिहं सोढी
१८ सितम्बर, २००७






ਕਿੱਥੇ ਗਈਆਂ ਭੈਣਾ ਤੇ ਕਿੱਥੇ ਗਈਆਂ ਮਾਂਵਾ
ਹੱਥ ਦੀਆਂ ਰਖੜੀਆਂ ਤੇ ਮਮਤਾ ਦੀਆਂ ਛਾਂਵਾ,

ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਮਾਸੀ ਦਾ ਰਿਸ਼ਤਾ ਤੇ ਕੀ ਹੁੰਦੀਆਂ ਨੇ ਭੈਣਾ ਨਾਲ ਲੜਾਈਆਂ,
ਦਸੋ ਏਨਾ ਯਾਦਾਂ ਨੂੰ ਮੈਂ ਕਿਹੜੇ ਖੂਹ ਚ' ਪਾਂਵਾ,

ਕਿੱਥੇ ਗਈਆਂ ਸੱਸਿਆਂ ਤੇ ਕਿੱਥੇ ਗਈਆਂ ਹੀਰਾਂ,
ੳਨਾ ਸੋਹਣਿਆਂ ਨੂੰ ਕਿਹੜੇ ਹੜ੍ਹਾਂ ਚ' ਲੱਭਣ ਜਾਂਵਾ

ਰਾਜਿਆਂ ਤੇ ਰਾਣਿਆਂ ਦੀ ਕਹਾਣਿਆਂ ਚੋ ਰਾਣਿਆਂ ਨੇ ਮੁੱਕਿਆਂ,
ੳ ਕਹਾਣਿਆਂ ਸੁਨਾੳਣ ਵਾਸਤੇ ਦਾਦੀ ਨਾਨੀ ਕਿੱਥੋ ਲਿਆਂਵਾ,

ੳ ਚੂੜਿਆਂ ਦੀ ਛਣਕਾਰ ਤੇ ਮੇਹੰਦੀ ਦੀ ਖੂਸ਼ਬੂ,
ਵਿਦਾ ਹੂੰਦੀ ਭੈਣਾ ਦੇ ਅੱਥਰੂ ਮੈਂ ਕਿੰਵੇ ਸੁਕਾਵਾਂ

ਜੰਮਦੀਆਂ ਕੁੜਿਆਂ ਨੂੰ ਮਾਰਣ ਵਾਲਿੳ
ਏ ਗੱਲਾ ਦਸੋ ਮੈ ਤੁਹਾਨੂੰ ਕਿੰਵੇ ਸਮਝਾਂਵਾ

'ਤੁਹਾਡਾ ਮਿਤੱਰ' ਗੁਰਨਾਮ ਸਿੰਘ ਸੌਢੀ
੧੮ ਸਿਤਂਬਰ, ੨੦੦੭

कुछ पागल होते हैं...

प्यार के दीप जलाने वाले कुछ पागल होते हैं
अपनी जान से जाने वाले कुछ पागल होते हैं

कहते हैं अपने दिल की बात दिल मे छुपा कर रखनी चाहिए
दिल की पूरी बात किसी को बताने वाले कुछ पागल होते हैं

हर पल किसी के ख्वाब रहते हैं आँखों मे
ख्वाबों मे मुस्कुराने वाले कुछ पागल होते हैं

इस झूठी दुनिया मे ये हमने हमेशा देखा है
सच्ची बात बताने वाले कुछ पागल होते हैं

दिलवाले कहाँ किसी बाग की बहार को चाहते हैं
दूसरों को महकाने वाले कुछ पागल होते हैं

दिन मे अँधेरा और रातों मे रोशनी जब दिखने लगे तो पता लगा कि
पागल को समझाने वाले कुछ पागल होते हैं

जुदाई मे भी जब कोई साथ ही नज़र आने लगे तो जाना,
दिलों की बातें करने वाले कुछ पागल होते हैं

बिना किसी वजह के रोना, मुस्कुराना अच्छा लगता है
रात भर अश्क़ बहाने वाले कुछ पागल होते हैं

हवा मे किसी की खुशबू ढूँढते हैं,
किसी को दिल से चाहने वाले कुछ पागल होते हैं

'आपकामित्र' गुरनाम सिहं सोढी
२१ जुलाई, २००७