20/8/07

मेरा इकरार...

सुनो, मै तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ,
अगर इजाज़त हो, तो अपने दिल मे छुपे जज़बात तुमसे कहना चाहता हूँ

जिस को तुम कभी आईना, कभी पत्थर कहती हो
मै उसी दिल मे रहना चाहता हूँ

इन लहरों का डर नहीं, ना है किसी किनारे से मुझे प्यार
थाम लो हाथ मेरा, आज मैं बस बहना चाहता हूँ

क्या याद करोगी मुझे, जब पास ना हूँगा तुम्हारे
तुम्हारी बातों, तुम्हारे ख्यालों मे रहना चाहता हूँ

हो सकता है कोई तुम्हे ये सब मुझसे पहले कह चुका हो
कहो तो मै अपने दिल पर ये बात लिख कर इसे अमर करना चाहता हूँ,

बस यही डर, कि जाने तुम्हारा क्या जवाब होगा,
बस हाँ ही कहो तुम, दिल की बात कुछ इस तरह कहना चाहता हूँ

तेरे अक्स से, अकेले मे तो कई बार कह चुका हूँ,
गर बुरा ना मानो, तो तुम्हारे सामने कहना चाहता हूँ,

मुमकिन है कि तुम्हारा जवाब ना हो और मुझसे नाराज़ हो कर चली जाओ,
कुछ भी ना हो ऐसा, इसलिए कुछ और देर चुप रहना चाहता हूँ

'आपकामित्र' गुरनाम सिहं सोढी
१८ अगस्त, २००७