19/8/07

वो लड़की...

वो लड़की भी कुछ अजीब है, हर बार सज़ा देती है
फिर हँसती है इतना कि सब कुछ भुला देती है

कभी नाराज़ हो जाए तो झट से रो पड़ती है
मुँह फेरती है कुछ ऐसे कि सब कुछ भुला देती है

उस से पूछो कि बता कि दिल मे किस की चाहत है
शरारत भरी नजरें उठा कर मुस्कुरा देती है

कहती है कि पुरानी बातें मत दोहराया करो
मै ना कुछ कहूँ तो खुद ही सब सुना देती है

खुद ही कहती है कि अपनी बातों से दिल मे ना हलचल पैदा करो
फिर खुद ही कुछ ऐसा कहती है कि दिल मे आग लगा देती है

आज हम मे कुछ फासले, कुछ दूरियाँ हैं,
पर हर वक्त उसकी याद दिल को पूरी तरह तड़पा देती है

जब कभी बात होती है उस से मेरी,
मेरी हर बात को मज़ाक मे उड़ा देती है

कल कहा उसने कि वो भी जा रही है कुछ नई मंज़िलों की तलाश मे
और फिर मिलने का दिलासा देकर आँखों को क्या, दिल तक को रुला देती है

लगता है कि पीछली बार की मुलाकात आखिरी थी,
उस दिन हुई बातें मुझे रुला देती हैं

कहती थी कि चलते रहना ज़िन्दगी का नाम है
ज़िन्दगी कुछ से जुदा करती है तो नए दोस्तों से मिला देती है

'आपकामित्र' गुरनाम सिहं सोढी
१८ अगस्त, २००७