20/12/07

त्योहारों को साथ लेकार आया ये मौसम आपको मुबारक हो

त्योहारों को साथ लेकार आया ये मौसम आपको मुबारक हो,
सुबह की वो ठण्डी हवा, वो ओस से भीगे पत्ते आपको मुबारक हो,

हवा मे आज खुशबू कुछ विचित्र है,
शायद गीले रंग लिए कोई चित्र है,
या एक अरसे बाद मिला एक मित्र है,
या हाथ मे खुशी से भरा एक पत्र है,
उस पत्र का हर शब्द आपको मुबारक हो,

सुबह की सैर एक सफर बेहतरीन है,
पैरों के नीचे घास जैसे मखमल महीन है,
एक उमंग शरीर मे भरती ठण्डी ज़मीन है,
पक्षियों का सुबह का ये कलरव आपको मुबारक हो,

ये ओस, जैसे किसी कामगर का पसीना हो,
नहा कर निकली, बिना शिंगार के एक हसीना हो,
एक साफ स्वच्छ दर्पण, एक धुला हुआ बर्तन हो,
इस मौसम का ये आकर्षण मुबारक हो,

पत्तों की आवाज़, जैसे एक छोटी सी बच्ची की पायल,
सुन कर जिसे, कोई भी हो जाए कायल,
माँ का वो आँचल, हसीना का रंग कुछ श्यामल,
बिना किसी द्वन्द्ध के मिली एक जीत आपको मुबारक हो,

त्योहारों को लेकर आया ये मौसम आपको मुबारक हो

'आपकामित्र' गुरनाम सिहं सोढी
२१ अक्तूबर, २००७

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