19/10/07

खुशियों के पल भी आएँगें...

गुलाब से पहले काँटें उग आए तो क्या,
फूल भी खुशबू फैलाएँगें,
कुछ पल दुख के मिले हैं तो क्या,
खुशियों के पल भी आएँगें,

अच्छे बुरे दिन साथी आते रहेंगें,
कभी हँसते तो कभी रुलाते रहेंगें,
बस एक बात याद रखना,
तपती गर्मी के बाद बादल सबकी प्यास बुझाएँगें,

इस ज़िन्दगी के लम्हे सब अजीब से हैं,
चाहे लोगों के दिल कुछ गरीब से हैं,
तू फिर भी अपना हौंसला रख हमेशा,
कि सच्चे दोस्त तेरी मुस्कुराहट को मुस्कान मे बदल जाएँगें,

पता नहीं क्यों लोग ज़िन्दगी से रूठे हैं,
खुद कि किस्मत को ही दोष दिए बैठे हैं,
इन तारे सितारों के पीछे मत भागो,
ये लकीरें नहीं, तुम्हारे कर्म ही तुम्हे सफलता दिलाएँगें,

पतझड़ मे माना कुछ पत्ते सूख कर गिर जाते हैं,
ये भी सच ही कि चाहे तो भी वो फिर से नहीं जुड़ पाते हैं,
क्योंकि एक नई बहार के साथ नया रंग लिए पत्ते फिर से लहलाएँगें

'आपकामित्र' गुरनाम सिहं सोढी
१३ अक्तूबर, २००७

1 comments:

अतुल said...

वाह! खूब!

अतुल