24/9/07

कुछ पागल होते हैं...

प्यार के दीप जलाने वाले कुछ पागल होते हैं
अपनी जान से जाने वाले कुछ पागल होते हैं

कहते हैं अपने दिल की बात दिल मे छुपा कर रखनी चाहिए
दिल की पूरी बात किसी को बताने वाले कुछ पागल होते हैं

हर पल किसी के ख्वाब रहते हैं आँखों मे
ख्वाबों मे मुस्कुराने वाले कुछ पागल होते हैं

इस झूठी दुनिया मे ये हमने हमेशा देखा है
सच्ची बात बताने वाले कुछ पागल होते हैं

दिलवाले कहाँ किसी बाग की बहार को चाहते हैं
दूसरों को महकाने वाले कुछ पागल होते हैं

दिन मे अँधेरा और रातों मे रोशनी जब दिखने लगे तो पता लगा कि
पागल को समझाने वाले कुछ पागल होते हैं

जुदाई मे भी जब कोई साथ ही नज़र आने लगे तो जाना,
दिलों की बातें करने वाले कुछ पागल होते हैं

बिना किसी वजह के रोना, मुस्कुराना अच्छा लगता है
रात भर अश्क़ बहाने वाले कुछ पागल होते हैं

हवा मे किसी की खुशबू ढूँढते हैं,
किसी को दिल से चाहने वाले कुछ पागल होते हैं

'आपकामित्र' गुरनाम सिहं सोढी
२१ जुलाई, २००७

1 comments:

deepanjali said...

आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा.
ऎसेही लिखेते रहिये.
क्यों न आप अपना ब्लोग ब्लोगअड्डा में शामिल कर के अपने विचार ऒंर लोगों तक पहुंचाते.
जो हमे अच्छा लगे.
वो सबको पता चले.
ऎसा छोटासा प्रयास है.
हमारे इस प्रयास में.
आप भी शामिल हो जाइयॆ.
एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.