ज़िन्दगी मे खुश रहना चाहते हो तो कभी अफसोस मत करो,
नाकामयाबियों को भूल जाओ, खुद पर उन्हे कभी हावी मत करो,
एक पेड़ को देखो, अपने फल, पत्ते,
यहाँ तक कि खुद को भी दूसरों पर समर्पित कर देता है,
दूसरों के लिए जो भी कर सकते हो करो,
पर किसी पर अपने एहसान का इज़हार मत करो,
सीखो उस किसान के सब्र से,
जो गन्ने की फसल बो कर कई साल इन्तज़ार करता है,
मेहनत करते रहो अपनी मंज़िल को पाने के लिए
इस सफर मे थक कर अपनी हार स्वीकार मत करो,
अकेले हो दुनिया मे,
फूलों की तरह इन्तज़ार है तुम्हे किसी का,
क्या हुआ अगर एक मोड़ पर अकेला पाते हो खुद को,
फूलों पर आएँगीं तितलियाँ, ये इन्तज़ार बंद मत करो,
मुश्किलों से डरना तुम्हारा काम नहीं
मोती चुनने के लिए सागर मे डूबना ही पड़ता है,
तालाब मे हाथ मारने से कुछ नहीं मिलता,
यूँ अपने इन्सान के नाम को ख़राब तो मत करो,
खुशियों के रंग भरे पड़े हैं हर जगह
एक रंग खत्म होने पर यूँ अफसोस मत करो...
'आपकामित्र' गुरनाम सिहं सोढी
५ जुलाई, २००७
12/9/07
अफसोस मत करो....
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4 comments:
"मुश्किलों से डरना तुम्हारा काम नहीं
मोती चुनने के लिए सागर मे डूबना ही पड़ता है,
तालाब मे हाथ मारने से कुछ नहीं मिलता,
यूँ अपने इन्सान के नाम को ख़राब तो मत करो,"
ऐसी सकारत्मक रचना के लिये आभार !!!
उत्साह वर्धन करती हुई कविता है।
और ये सही है की हार और नाकामियाबी को अपने ऊपर हावी नही होने देना चाहिऐ।
आपकी रचना पढ़कर एक कविता की कुछ पंक्तियाँ याद आती है सुनियेगा...
डुबकियाँ सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा-जाकर खाली हाथ लौटकर आता है,
मिलते न सहज ही मोती गहरे पानी मे,
बढ़ता दूना उत्साह इसी हैरानी में,
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नही होती,
कोशिश करने वालो की हार नही होती...
शुक्रिया बहुत सुन्दर कविता लिखी है आपने...
शानू
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