जुदा हो गए हम तुमसे तो क्या, मरे तो नहीं
चले जा रहे हो तुम जाने कहाँ, जा रहे हम और कहीं
मालूम है कि भूल जाओगे हमें, हमारे जाते ही
समझ ना सके तुम्हारे दिल को, इतने नादान हम भी नहीं
किसी की याद मे आँसू बहाना तो बस कहने भर की बात है
हमारे नाम पर मुस्कुराना भी मुमकिन ना होगा, कुछ वक्त बीते तो सही
बादल बरस कर थम जाएँ तो मोर भी कहाँ नाचता है
फल खाने के बाद गुठलियाँ घर मे कोई सँभालता नहीं
रास्ते हमारे अलग हुए, जाने अब कब मुलाकात हो
कुछ दिनों के बाद देखोगे पुरानी तस्वीरें
तो कहोगे कि ये बेजान हैं, कुछ बोलती नहीं
हँस कर बात कर लेते हो मिलने पर आज तो
कल क्या पता जाने हम याद आएँ
या सोचे हम-तुम कि वो बातें आखिर किधर गईं
गर ज़िन्दगी के किसी मोड़ पर कभी मुलाकात हो
तो उम्मीद है कि पहचान लोगे हमें, चाहे फिर कह देना
हम तो नहीं बदले, पर जिसे हम जानते थे तुम वो GSS तो नहीं
'आपकामित्र' गुरनाम सिहं सोढी
१४ जून, २००७
30/8/07
जुदा हुए हम तो क्या़!!!
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2 comments:
बढिया रचना है।
दिल की कलम से
नाम आसमान पर लिख देंगे कसम से
गिराएंगे मिलकर बिजलियाँ
लिख लेख कविता कहानियाँ
हिन्दी छा जाए ऐसे
दुनियावाले दबालें दाँतो तले उगलियाँ ।
NishikantWorld
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