लिखने बैठा आज जब अपनी कहानी तो याद आया,
तुम्हारे बिना मेरी हर कहानी अधूरी रह जाएगी,
मेरी किसी ना किसी याद मे तुम बसे हो,
तुम्हारे बिन मेरी यादें अधूरी रह जाएगीं,
सोचना कभी अकेले बैठ कर,
वो पल जो साथ बिताए थे हमने,
जुदा होने से खुश हो, तो यूँ ही सही,
पर किसी दिन ये खुशी भी अधूरी रह जाएगी,
एक एक करके इन तस्वीरों को जब देखता हूँ,
तो हर दिन सामने से गुज़र जाता है,
सोचता हूँ कि अलविदा कहने का वक्त आ गया,
पर अलविदा कहते हुए ये ज़ुबाँ वहीं ठहर जाएगी,
यूँ तो कोई उम्मीद नहीं रखता कि याद भी रखोगे,
फिर भी कभी मिले तो खुशी होगी,
कभी याद आए तो बात कर लेना,
तुम्हारी आवाज़ सुन कर ही दिल को खुशी मिल जाएगी,
नई मज़िंले बुला रही हैं मुझे,
कुछ मज़िंलों को तुम्हारी तलाश है,
लिखुँगा अपनी कहानी किसी मंज़िल पर पहुँच कर फिर से,
पर पीछे छूट रही ये राहें अधूरी रह जाएँगीं,
'आपकामित्र' गुरनाम सिहं सोढी
१ जुलाई, २००७
29/8/07
मेरी यादें अधूरी रह जाएँगीं
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2 comments:
अच्छी कविता लिखी है ।
घुघूती बासूती
बहुत अच्छी रचना है।मनोभावों को व्यक्त करने में सफल रहे हैं।
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